Saturday, March 13, 2021

श्रीमद्भगवद्गीता में सांख्य योग

 श्रीमद्भगवद्गीत अध्याय - 13 में सांख्य योग दर्शन का प्रयोग अधिक हुआ है ।

जबतक सांख्य की प्रारंभिक 68 कारिकाओं का थीक -  थीक अध्ययन नहीं किया जाता तबतक गीता के सम्बंधित श्लोकों को समझना कठिन होगा।

यहाँ गीता में सांख्य दर्शन के प्रयोग सम्बंधित दो उदहारण दिए जा रहे हैं 👇




Tuesday, February 23, 2021

गीता परिचय - 2 गीता से मैत्री साधें

 श्रीमद्भगवद्गीत में ज्ञानयोग के लिए माया , ब्रह्म , आत्मा और परमात्मा , कर्मयोग में कर्मबंधन जैसे आसक्ति , कामना , क्रोध , लोभ , मोह , भय , आलस्य और अहँकार की साधना तथा सांख्ययोग में प्रकृति - पुरुष के प्रति बोध उत्पन्न करना जो पतंजलि योग सूत्रों की सिद्धि से संभव है , जैसे तत्त्व बोध की गणित दी गयी है । गीता साधना , अनंत की साधना है जिसमें प्रवेश पाना अति सरल है लेकिन इसके बाहर निकलना संभव नहीं।

ध्यान रखें , 

गीता के अंदर ब्रह्म , आत्मा और पुरुष से मैत्री स्थापित होती है और 

गीता से बाहर माया - प्रकृति के सम्मोहन में रहना होता है। अब आपको सोचना है कि आपको किधर जाना है ? 

यदि आप ब्रह्म के जिज्ञासु हैं , तो आप मेरे संग बने रहिये और गीता परिचय आप का साथ देता रहेगा ।



गीता परिचय अंक - 1

 


Wednesday, January 27, 2021

धारणा ध्यान और समाधि क्या हैं

 अष्टांगयोग के 08 अंगों में से आखिरी 03 अंग धारणा , ध्यान और समाधि हैं ।

महर्षि पतंजलि के शब्दों में इन तीन अंगों की परिभाषाओं को देखें और समझें।

ऋषि के शब्दों से निर्मल सात्त्विक ऊर्जा का विकिरण होता होता रहता है जो जिज्ञासुओं को साधना की उच्च भूमियों में पहुंचने में सहयोग करते हैं ।



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