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Tuesday, February 1, 2011

गीता अध्याय - 02

पहला सोपान



गीता अध्याय - 02 को हम यहाँ निम्न भागों में देख रहे हैं ------

ध्यानोपयोगी सूत्र

गीता योगी और वेदों का सम्बन्ध

आत्मा

स्थिर प्रज्ञा वाला योगी

प्रथम सोपान के अंतर्गत ध्यानोपयोगी सूत्रों में हमनें इस अध्याय के बाईस सूत्रों को देखा और
साथ अन्य अध्यायों के चौबीस अन्य सूत्रों को भी देखा । अब हम अभी तक जो कुछ भी
अध्याय - दो के अंतर्गत देखा है ,उसका सारांश पुनः देखते है फिर अगले सोपान पर चलेंगे ।
[क] भोग में आसक्त मन प्रज्ञा को भी अपने साथ ले लेता है ।

[ख] कर्म इन्द्रियों को मन - माध्यम से साधना चाहिए ।


[ग] प्रकृति के तीन गुण मनुष्य के स्वभाव का निर्माण करते हैं ।

[घ] मनन से आसक्ति , आसक्ति से कामना , कामना से क्रोध उत्पन्न होता है ।

[च] मोह और वैराग्य एक साथ एक बुद्धि में नहीं रहते ।

[छ] चाह रहित कर्म निर्वाण का द्वार है ।


अब अगले अंक में हम देखेंगे - वेदों का
गीता - योगी से सम्बन्ध कैसा है ?

गीता मन की गणित है , इसको वह समझता है
जो अपनें मन को अपनें से अलग देखनें का यत्न करे ॥

===== एक ओंकार ======


Saturday, December 4, 2010

गीता अध्याय - 02

भाग - 02

अध्याय सारांश

अध्याय एक में अर्जुन की दो बातें ऎसी हैं जो प्रभु को आगे उपदेश के लिए आकर्षित करती हैं ;
मोह के लक्षण और कुल- धर्म एवं जाती धर्म की बातें ।
अध्याय एक में तीन श्लोक - 1.28 , 1.29 , 1.30 अर्जुन के ऐसी श्लोक हैं जिनमें मोह के लक्षणों को
अप्रत्यक्ष रूप में बोला गया है ।
प्रभु श्री कृष्ण गीता में एक साँख्ययोगी के रूप मेंहैं और वैज्ञानिक का दूसरा नाम ही है - सांख्य - योगी ॥
अर्जुन जब प्रभु के सामनें कुल - धर्म एवं जाती - धर्म की बातें रखते हैं तब प्रभु कुछ बोलते तो नहीं हैं लेकीन
इन दो बांतों से हट कर कर्म - योग , ज्ञान - योग , संन्यास , त्याग एवं अन्य बाँतें उनकी चर्चा के बिषय बन जातेहैं ।
मोह गीता का बीज है और प्रभु मोह में डूबे अर्जुन को सबसे पहले बता रहे हैं -
आत्मा के सम्बन्ध में , यह
कहते हुए की .....
आत्मा अब्यक्त है , असोच्य है और इस को वह समझता है जो .....
मन - बुद्धि से परे की यात्रा पर हो ॥
आत्मा गुनातीत योगी का बिषय है और ....
प्रभु इसे ऐसे ब्यक्ति से बता रहे हैं जो .....
पूर्णरूप से मोह में डूबा हुआ है ॥
एक मोहित ब्यक्ति कैसे गीता ज्ञान में वह भी आत्मा को समझनें में रूचि दिखा सकता है ?
यह आप के लिए एक सोच का बिषय है ....
आप इस पर सोचना प्रारंभ करें .....
कल फिर मिलेंगे ॥

===== ॐ =====

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