भाग - 04
आत्मा - 02
न अयं हन्ति न हन्यते --- गीता - 2.19
neither slays nor is slain
न हन्यते हन्यमाने शरीरे --- गीता -- 2.20
He is not slain when the body is slain
अब्यक्त : अचिन्त्य : अविकार्य : अयं ---- गीता -- 2.25
unmanifest, unthinkable, incomprehensible, immutable is , He
समाधि में जो दिखता है , वह है आत्मा
और आत्मा वह है जो गीता के माध्यम से ऊपर बताया गया ॥
secrets of Atman is decoded during the experiencing of the beautitude of samadhi
but this could not be expressed in terms of words or through spoken languages.
ऐसे लोग शादियों के बाद अवतरित होते हैं जिनको .....
आत्मा का बोध होता है ॥
परम श्री कृष्ण जैसा गुरु
और अर्जुन जैसा शिष्य
जब
बतानें और समझनें में असफल रहे ...
तो मैं क्या बता सकता हूँ और ....
पढ़नें वाला क्या समझ सकता है , लेकीन ....
आज का भौतिक विज्ञान विशेष तौर पर particle physics की आज की जो खोज न्यूट्रिनो आदि बारीक
पार्टिकल्स खोज चल रही है उसका केंद्र आत्मा की ही खोज है ॥
जीव कैसे बना ? यह है विज्ञान का मूल बिषय जिस पर आज गहरा शोध चल रहा है और
जीव होनें में जीवात्मा का रहस्य छिपा है ॥
आप भी कुछ देखिये
और फिर मिलेंगे आत्मा के कुछ और सूत्रों के साथ ॥
===== ॐ =====
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Tuesday, February 8, 2011
Wednesday, April 22, 2009
आत्मा क्या है ?------२
आप के लिए कुछ प्रश्न
१- विज्ञान विकास के साथ और अतृप्त क्यो होरहा है ?
२- आज विज्ञानं क्या खोज रहा है ?
३- सजीव क्या है ? और निर्जीव क्या है ?
४- कौन जड़ और कौन चेतन है ?
५- १४ मिलिओंन वर्ष पूर्ब १०० मिलिओंन वर्ग प्रकाश-वर्ष क्षेत्रफल का प्राथमिक हाइड्रोजन एटम जो बनाथाऔर जिस से ब्रह्माण्ड की रचना हुयी थी वह किस से और किस में बना था ?
यदि आप वैज्ञानिक सोच रखते हैं तो आप इन प्रश्नों को गंभीरता से देखें । आज २१वी शताब्दी विज्ञानं की
शताब्दी है , सभींलोगो का केन्द्र मन-बुद्धि तंत्र है , सब संदेह में जीते हैं क्योकि जितना गहरा संदेह होता है , उतना
गहरा विज्ञानं निकलता है । विज्ञानं की उर्जा संदेह है और गीता की उर्जा श्रद्धा है --श्रद्धा एवं संदेह एक साथ एक
बुद्धि में नही रह सकते । आप यह न सोचें की यहाँ गीता को विज्ञानं के साथ जोडनें का प्रयत्न किया जा रहा है ।
विज्ञानं की सीमा जहाँ समाप्त सी दिखने लगाती है वहाँ से गीता प्रारंभ होता है ।
५००० इशा पूर्व गीता आत्मा को ब्यक्त करनें के सम्बन्ध में कहा ---------
आत्मा सर्व ब्यापी , अच्छेद्य , अदाह्य , अक्लेद्य , अशोष्य तथा नित्य है [गीता सूत्र..२.२४] ।
आत्मा नाश रहित, अजन्मा, अव्यय है [गीता सूत्र ..२.२१] ।
आत्मा अचिन्त्य, निर्विकार , [सूत्र ..२.२५] है ,यह न तो मारता है , न मारा जा सकता है [गीता सूत्र..२.१९] ।
यह बात गीता की ७००० वर्ष पुरानी है लेकिन आज की कण -भौतिकी [particle physics ] की खोज क्या
यही खोज नही है ?----सोचिये और खूब सोचिये जब तक आप की बुद्धि रुक न जाए --जब बुद्धि रुक जाती है तब
सत्य की अनुभूति होती है ।
आज का क्वांटम विज्ञानं [quantum mechanics ] कहता है ----कोई भी सूचना पुरी तरह से समाप्त नही
की जा सकती और आज जो भी है वह चेतना का फैलाव है अर्थात विज्ञान में आज न तो कोई चीज जड़ है न ही
कोई चीज मुर्दा है । क्या आप जानते हैं की ---कब्र में दफन ब्यक्ति के बाल एवं नाखून बढ़ते रहते हैं --ऐसा क्यों
होता है जबकि वह ब्यक्ति मुर्दा हो चुका होता है ? यदि उनमें विकास हो रहा है तो उनमे प्राण ऊर्जा भी होनी चाहिए
और प्राण ऊर्जा का दूसरा नाम ही आत्मा है
हिंदू मान्यता कहती है ---कामना का गुलाम जब मरता है तब वह भूत बन जाता है । गीता सूत्र ८.६ एवं १५.८
कहते हैं---जब आत्मा शरीर छोड़ कर जाता है तब उसके साथ मन एवं इन्द्रियाँ भी रहती हैं तथा अतृप्त सघन
कामनाएं आत्मा को नया शरीर धारण करनें के लिए बाध्य करती हैं । यह बात तो गीता की है अब आप विज्ञानं
को देखिये----विज्ञानं कहता है ....बड़े तारे अपने अंत समय में ब्लैक होल [black hole ] में बदल जाते हैं और
अपनें आस-पास के तारों को निगल जाते हैं अर्थात भूत बन जाते हैं ।
हमारा काम है आप के बुद्धि के उपर पड़े चादर को उठाना और जब ऐसा सम्भव होगा तबआप पढ़ेगे नही- लोग
आप को पढेंगे ।
=======ॐ======
१- विज्ञान विकास के साथ और अतृप्त क्यो होरहा है ?
२- आज विज्ञानं क्या खोज रहा है ?
३- सजीव क्या है ? और निर्जीव क्या है ?
४- कौन जड़ और कौन चेतन है ?
५- १४ मिलिओंन वर्ष पूर्ब १०० मिलिओंन वर्ग प्रकाश-वर्ष क्षेत्रफल का प्राथमिक हाइड्रोजन एटम जो बनाथाऔर जिस से ब्रह्माण्ड की रचना हुयी थी वह किस से और किस में बना था ?
यदि आप वैज्ञानिक सोच रखते हैं तो आप इन प्रश्नों को गंभीरता से देखें । आज २१वी शताब्दी विज्ञानं की
शताब्दी है , सभींलोगो का केन्द्र मन-बुद्धि तंत्र है , सब संदेह में जीते हैं क्योकि जितना गहरा संदेह होता है , उतना
गहरा विज्ञानं निकलता है । विज्ञानं की उर्जा संदेह है और गीता की उर्जा श्रद्धा है --श्रद्धा एवं संदेह एक साथ एक
बुद्धि में नही रह सकते । आप यह न सोचें की यहाँ गीता को विज्ञानं के साथ जोडनें का प्रयत्न किया जा रहा है ।
विज्ञानं की सीमा जहाँ समाप्त सी दिखने लगाती है वहाँ से गीता प्रारंभ होता है ।
५००० इशा पूर्व गीता आत्मा को ब्यक्त करनें के सम्बन्ध में कहा ---------
आत्मा सर्व ब्यापी , अच्छेद्य , अदाह्य , अक्लेद्य , अशोष्य तथा नित्य है [गीता सूत्र..२.२४] ।
आत्मा नाश रहित, अजन्मा, अव्यय है [गीता सूत्र ..२.२१] ।
आत्मा अचिन्त्य, निर्विकार , [सूत्र ..२.२५] है ,यह न तो मारता है , न मारा जा सकता है [गीता सूत्र..२.१९] ।
यह बात गीता की ७००० वर्ष पुरानी है लेकिन आज की कण -भौतिकी [particle physics ] की खोज क्या
यही खोज नही है ?----सोचिये और खूब सोचिये जब तक आप की बुद्धि रुक न जाए --जब बुद्धि रुक जाती है तब
सत्य की अनुभूति होती है ।
आज का क्वांटम विज्ञानं [quantum mechanics ] कहता है ----कोई भी सूचना पुरी तरह से समाप्त नही
की जा सकती और आज जो भी है वह चेतना का फैलाव है अर्थात विज्ञान में आज न तो कोई चीज जड़ है न ही
कोई चीज मुर्दा है । क्या आप जानते हैं की ---कब्र में दफन ब्यक्ति के बाल एवं नाखून बढ़ते रहते हैं --ऐसा क्यों
होता है जबकि वह ब्यक्ति मुर्दा हो चुका होता है ? यदि उनमें विकास हो रहा है तो उनमे प्राण ऊर्जा भी होनी चाहिए
और प्राण ऊर्जा का दूसरा नाम ही आत्मा है
हिंदू मान्यता कहती है ---कामना का गुलाम जब मरता है तब वह भूत बन जाता है । गीता सूत्र ८.६ एवं १५.८
कहते हैं---जब आत्मा शरीर छोड़ कर जाता है तब उसके साथ मन एवं इन्द्रियाँ भी रहती हैं तथा अतृप्त सघन
कामनाएं आत्मा को नया शरीर धारण करनें के लिए बाध्य करती हैं । यह बात तो गीता की है अब आप विज्ञानं
को देखिये----विज्ञानं कहता है ....बड़े तारे अपने अंत समय में ब्लैक होल [black hole ] में बदल जाते हैं और
अपनें आस-पास के तारों को निगल जाते हैं अर्थात भूत बन जाते हैं ।
हमारा काम है आप के बुद्धि के उपर पड़े चादर को उठाना और जब ऐसा सम्भव होगा तबआप पढ़ेगे नही- लोग
आप को पढेंगे ।
=======ॐ======
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