Showing posts with label देखो इन पद चीन्हों को. Show all posts
Showing posts with label देखो इन पद चीन्हों को. Show all posts

Monday, November 1, 2010

क्या ब्रह्म कोई सूचना है ?

मन - बुद्धि स्तर पर .......
साकार - निराकार कल्पना के स्तर पर .....
गीता में ब्रह्म क्या हो सकता है ? इस प्रश्न पर
हम गीता सागर में तैर रहे हैं ,
तो आइये ! देखते हैं , आगे क्या है ?

गीता सूत्र - 7.7
प्रभु कहते हैं -----
ससार की स्थिति एक माले जैसी है जिसका न दिखनें वाला सूत्र [ धागा ] , मैं हूँ ॥

गीता सूत्र - 13.14
वह सर्वत्र है , उसकी इन्द्रियाँ सभी जगह हैं और वह सब में है ॥

गीता सूत्र - 13.15
वह सबके अन्दर- बाहर , दूर - नजदीक समान रूप से है ॥

गीता सूत्र - 13.15
स्वयं इन्द्रिय - गुण रहित लेकीन सब का श्रोत , वह स्वयं है ॥

गीता सूत्र - 10.22
इन्द्रियाणां मनश्चाष्मी ॥

गीता सूत्र - 7.12
सभी गुण एवं उनके भाव मुझसे हैं लेकीन मैं भावातीत - गुनातीत हूँ ॥

गीता सूत्र - 7.14
तीन गुणों की माया जिस से यह संसार की रचना है , उसे समझना संभव नहीं ॥
गीता सूत्र - 7.13
गुनाधींन गुनातीत को नहीं समझ सकता ॥

गीता के कुछ ऐसे सूत्रों को मैं गीता से चुन कर लाया हूँ जो आप के
मन - बुद्धि की दिशा को बदलनें वाले हैं ।
मैं अपनें तरफ से कुछ कह नहीं रहा , हमें गीता से जो कुछ मिलता है ,
उसे मैं आप को देना अपना
धर्म समझता हूँ ,
आगे उसका प्रयोग आप कैसे करते हैं , यह आप पर निर्भर है ॥

===== ॐ =======

Followers