Monday, September 21, 2015

गीता के मोती - 50

Tab: बिषय Page 1:
 1 - आसक्ति बंधनसे मुक्ति सत्संगसे मिलती है ।
 2 - हृदय - ग्रंथियोंको खोलना ,ध्यान है । 
3 - इन्द्रियोंके केंद्र उनके अपनें - अपनें  बिषय हैं ।
 4 - कोई ऐसा बिषय नहीं जिसमें राग - द्वेषकी ऊर्जा न हो । 5 - राग -द्वेषसे  जो मुक्त है , वह योगी - सन्यासी है ।
 6 - दुःख संयोगवियोगः योगः । 
7 - आसक्ति , काम , कामना , क्रोध , लोभ , मोह , भय , आलस्य और अहंकार , ये भोगकी रस्सियाँ हैं ।
 8 - भोगकी रस्सियाँ तीन गुणोंकी बृत्तियाँ हैं ।
  9 - इन्द्रिय - बिषय संयोगकी निष्पत्ति , भोग है  । 
10 - भोगको योगका माध्यम समझना , ध्यान है । 

No comments:

Post a Comment

Followers