Thursday, December 9, 2021

गीता अध्याय - 7 की एक झलक

 


 श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय - 7

1 -इस अध्याय में 30 श्लोक हैं ।

2 -इस अध्याय में प्रभु वक्ता हैं , अर्जुन श्रोता हैं ।

3 - इस अध्याय के 30 श्लोकों में 22 श्लोक प्रभु से सम्बंधित हैं जैसा ऊपर स्लाइड में दिखाया गया है।


गीता अध्याय : 7 के कुछ ज्ञान सूत्र ⤵️

🌷  ज्ञानी दुर्लभ हैं ।

●सभीं भूत अपरा प्रकृति के 08 तत्त्वों एवं चेतना के योगसे हैं।

🌷 हजारों लोगों में कोई एक सिद्धि हेतु यत्न करता है और इन यत्नशील योगियों में कोई एक मुझे तत्त्वसे जानता है ।

🌷 गुणोंके भाव मुझसे हैं पर उन भावों में मैं नहीं ।

सभीं प्राणी तीन गुणों से सम्मोहित रहने के कारण मुझ गुणातीत को नहीं समझ पाते ।

🌷  अनेक जन्मों की तपस्यायों का फल ज्ञान है और ज्ञान से मुझे जाना जाता है ।

त्रिगुणी दुस्तर माया मोहित असुर होता है ।

अर्थार्थी , आर्त ( दुःख निवारण हेतु ) ,जिज्ञासु और ज्ञानी ये 04 प्रकार के उत्तम कर्म करने वाले भक्त मुझे भजते हैं ।

~~◆◆ ॐ ◆◆~~

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