Sunday, September 14, 2014

गीता के मोती - 32

● गीता के मोती - 32 ●
 <> योगी कौन है ? 
 # गीता - 5.23 में प्रभु इस इस प्रश्नके सम्वन्ध में कहते हैं ,
 " काम - क्रोधके बेगको सहन करनें में जो समर्थ है ,वह 
योगी है ।" 
~ अर्थात ~ 
 " योगी काम - क्रोधका गुलाम नहीं " 
# काम - क्रोध क्या हैं ? # 
** इस सम्बन्ध में प्रभु गीता - 3.37 में कहते हैं ,
" कामः एषः क्रोधः एषः रजोगुणसमुद्भवः " 
~ अर्थात ~ 
* रजो गुणका तत्त्व , काम है और क्रोध काम का ही रूपांतरण होता है ।
 # अब आप सोचें कि : ----
 > प्रभूकी बात कितनी स्पष्ट है ? <
 > प्रभुका वचन पूर्ण रूप से संदेह रहित एवं निर्मल है । 
# योग-साधन में काम-साधना कई चरणों में की जाती है जिसका प्रारम्भ बिषय से होता है । 
> तंत्र में कुल 64 योग विधियाँ हैं जो स्वाधिस्थान चक्र पर केन्द्रित उर्जाको ऊपर की और उठाती हैं और काम उर्जाका रुख नीचे से ऊपरकी ओर करती हैं ।
 > बिषय - इन्द्रिय सम्वन्धको गहराई समझना काम में वैराग्य उत्पन्न करता है । 
~~ ॐ ~~

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