Saturday, June 20, 2009

गीता से मैत्री स्थापित करो

आप जरा इन बातों पर सोचें
१- लोग मन्दिर जाते तो हैं लेकिन उनमे प्रेम की लहर क्यों नही दिखती ?
२- मन्दिर से वापिश आनें वाले ऐसे दिखते हैं जैसे जेल से आरहें हों ,क्यों ?
३- भय में डूबे लोग मन्दिर जाते ही क्यो हैं ?
४- क्या एक भयभीत ब्यक्ति पत्थर की मूर्ती में परमात्मा को देख सकता है ?
५- गीता के नामपर लोग क्यों सिकुड़ जाते हैं ?
६- हिदू लोग गीताकोअपनें घर में क्यो रखते हैं ?
७- गीता पड़नें वाले भी कम नहीं पर सभी गीता से भयभीत क्यों हैं ?
८- गीता के नाम पर लोग महाभारत की कहानियाँ क्यों सुनाते हैं ?
९- गीता कर्म के माध्यम से ज्ञान देता है लेकिन क्या भय के साथ ज्ञान पाया जा सकता है ?
१०- गीता अर्जुन को भय मुक्त करता है और हम गीता से डरते हैं , यह बिरोधाभास क्यों ?
११- गीता प्रेम की उर्जा ह्रदय में भरता है लेकिन इस बात को हम नहीं समझना चाहते , क्यों ?
१२- गीता भाव से भावातीत की यात्रा कराना चाहता है लेकिन हम भाव को छोड़ना नहीं चाहते , क्यों ?
यहाँ आप के लिए १२ बातों को दिया जा रहा है जो आप में गीता की उर्जा का संचार करनें की कोशिश करेंगे ।
=====ॐ=======

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