Saturday, June 4, 2011

गीता अध्याय- 04

[ ] योग सूत्र


यहाँ हम अब अगले सूत्रों को देखनें जा रहे हैं-------

गीता सूत्र –4.34 + 4.35

प्रभु श्री कृष्ण कहते हैं … ....

अर्जुन!तुम्हें किसी सत् गुरु की शरण में जाना चाहिए जो तत्त्व ज्ञान के माध्यम से तुम्हारा

मोह दूर कर सकता है//

Here Lord Krishna says …..

Arjuna ! You should surrender to a master who has perfected his Yoga and has realized the

ultimate truth . Such a Guru can take you out of your delusion .

अब दो सूत्र अध्याय – 18 से … ..

सूत्र –18.72

श्री कृष्ण कहते हैं -------

अर्जुन!क्या एकाग्र चित से तुमनें गीता सुना?क्या तुम्हारा अज्ञान जनित मोह समाप्त हो गया?

सूत्र –18.73

यहाँ अर्जुन कह रहे हैं … ..

हे अच्युत!मेरा मोह समाप्त हो गया है,मैं अपनी खोयी हुयी स्मृति प्राप्त कर ली है,यह सब

आप के प्रसाद स्वरुप मुझे प्राप्त हुआ है और अब मैं आप की शरण में हूँ/


यहाँ ऊपर के दो सूत्रों में आप को मोह , स्मृति एवं अज्ञान का समीकरण मिलता है , उसे

ठीक से समझनें का यत्न करें //


====ओम======


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