Thursday, June 20, 2013

गीता ज्ञान - 21

मन 

प्रभु श्री कृष्ण कह रहे हैं ::

" इन्द्रियाणाम् मनः च अहम् "
गीता - 10.22

और

 भागवत कह रहा है  :

[क] " संसार मन का विलास है "
भागवत - 11.13.1

[ख] " मन की 11 बृत्तियां हैं - 10 इन्द्रियाँ + अहँकार 
भागवत - 5.11

[ग] Max Planck [ 1918 - Noble Prize ] कहते हैं :
" Mind is the matrix of matters "


  • मनुष्य का जीवन मन आधारित है
  •  जो ---
  • भोग में रमाता है ...
  • भोग में वैराज्ञ दिखाता है ....
  • वैराज्ञ में संसार को अद्वैत के फैलाव स्वरु पहै, यह बात  समझाता  है ....
  • और ---
  • फिर धीरे से परम गति की ओर चला  कर स्वयं लुप्त हो कर ....
  • यात्री को द्रष्टा बना देता है /


=== ओम् ====


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