Thursday, March 18, 2021

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय : 1 भाग : 1

लोग पूछते हैं , आपको अकेले रहते भय नहीं लगता ? मैं उत्तर देता हूँ कि अकेले रहते तो नहीं डरता लेकिन भीड़ में रहने से डरता हूँ।

ऐसा क्यों ? क्योंकि भीड़ मुझे , मुझसे छीन लेती है और मैं अपनें को खोना नहीं चाहता । संसार तो जैसा है , वैसा ही आगे भी चलता रहेगा केवल मेरी जैसी मूर्तियाँ बदलती रहेगा । 

संसार की मूर्तियों के बदलाव की गणित में अगर आप की रुचि हो तो समझिए , गीता आपको बुला रहा है ।

गीता की यात्रा का आज दूसरा दिन है । इस यात्रांश में हम गीता अध्याय : 1 के सार को निम्न स्लाइड के माध्यम से देख सकते हैं।



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