Thursday, October 27, 2011

कर्म एक माध्यम है योग का

[]योग-सन्यास

सूत्र – 6.3

आरूढ़रुक्षो:मुने:योगं कर्म कारणं उच्यते

योग आरू ढ़स्य तस्य एव शम:कारणं उच्यते

कर्म योग में उतरनें का उत्तम माध्यम है और जब योगारूढ़ की स्थिति मिलती है तब सभीं कर्मों का त्याग स्वतः हो जाता है /


Action is the best mode of entering into Yoga and when depth in Yoga is achieved all actions are renunciated and whatever remains there is pure senenity .

प्रभु श्री कृष्ण इस सूत्र के माध्यम से कह रहे हैं -------

जो तुम कर रहे हो उसे तुम योग का माध्यम बना सकते हो , कहीं भागानें की जरुरत नहीं / कर्म के प्रति उठा होश तुमको योगी बना देगा और तुम स्वतः कर्म – त्यागी बन बैठोगे और तुमको पता भी न चल पायेगा / कर्म संन्यासी का यह अर्थ नहीं कि तुम कर्म करना छोड़ दोगे , कर्म तो करते ही रहना है लेकिन कर्म के बंधन स्वतः अनुपस्थित हो जाते हैं / कर्म में कर्म बंधन हैं , गुण तत्त्व जैसे आसक्ति , कामना , क्रोध , लोभ , मोह , भय एवं अहंकार /


========ओम्==========


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