Saturday, May 7, 2011

गीता अध्याय- 04

श्लोक- 4 . 12

इस श्लोक के माध्यम से प्रभु कह रहे हैं …........

कर्म – फल प्राप्ति के लिए लोग देवताओं की शरण में जाते हैं , उनकी पूजा करते हैं

और ऐसा करनें से उनकी कामना पूर्ण भी होती हैं /

In order to get the desired result of action being done , people go to worship various gods .

By doing so , their desires are fulfilled .


यह सूत्र समझनें के लिए हमें कुछ और सूत्रों को देखना होगा जो निम्न हैं …..

7 . 16 , 9 . 25 , 17 . 4 , 14 . 18 ,


प्रभु कहते हैं------

चार प्रकार ले लोग मुझे खोजते हैं ; भयभीत लोग , जिज्ञासु लोग , अर्थार्थी लोग , और

ज्ञानी लोग /

प्रभु कहते हैं …...

देवताओं की पूजा से कामना की पूर्ति तो होती है लेकिन ऐसे लोग मुझ से दूर रहते हैं /

देव पूजक देवताओं के लोक में मरणोपरांत पहुचते हैं , भूत – प्रेत पूजक भूत – प्रेतों के लोक मे पहुँचते हैं , पितर - पूजक पितरों के पास पहुंचाते है और जो बिना कामना मुझको भजते रहते हैं

वे सीधे आवागमन से मुक्त हो कर मुझमें समा जाते हैं /

ऊपर के सूत्रों को अगले अंक मे देखें जिनका भावार्थ ऊपर दिया जा चुका है //


===== ओम =======


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