Sunday, February 6, 2011

गीता अध्याय - 02




भाग - 03

आत्मा [ The soul ]

गीता में लगभग चौबीस श्लोक ऐसे हैं जो आत्मा को स्पष्ट करते हैं
कुछ इस प्रकार से की एक बुद्धि आधारित
ब्यक्ति आत्मा - रहस्य को कुछ - कुछ समझ सकता है
और ये श्लोक इस तरह से हैं ------
2.13 - 2.30 तक
18.61 , 10.20 , 15.8 , 15.15 , 13.18
13.32 , 13.33 , 14.5

जब इन श्लोकों को बार - बार मनन करते हैं तब जो भाव मन में आता है
वह कुछ इस प्रकार से होता है ------

आत्मा अब्यक्त है
आत्मा अचिन्त्य है
आत्मा भौतिक , रासायनिक और जैविक ढंग से .......
खंडित नहीं किया जा सकता ----
न मारा जा सकता है न मारता है ----
न जलता है न जलाता है ------
आत्मा नाम से प्रभु सभी भूतों के ह्रदय में स्थिर हैं और .....
सब को कर्मों के आधार पर यन्त्र की तरह चला रहे हैं ------
आत्मा सब के जीवन का आदि , मध्य और अंत है -----
आत्मा देह में सर्वत्र है ......
आत्मा मनुष्य के देह में प्राण ऊर्जा का श्रोत है -----
आत्मा तीन गुणों के माध्यम से देह से जुदा होता है -----
आत्मा जब देह छोड़ता है तब .......
इसके साथ मन - इन्द्रियाँ भी होती हैं जो ......
आत्मा को नया शरीर धारण करनें के लिए बाध्य करती हैं ॥

अब आप ऊपर दिए गए सारांश को ऊपर ही देये गए श्लोकों में खोज कर
गीता के आत्मा - रहस्य को अपना सकते हैं ॥

====== ॐ ========

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