Wednesday, October 21, 2009

गीता ध्यान बिधि - 1

गीता में प्रभू के श्लोक 2.2 से 18.72 के मध्य 556 श्लोक हैं और सभी श्लोक अपनें में एक ध्यान-बिधि है लेकिन प्रभू विशेष रूप से कुछ बिधियों को बताया है जिनको यहाँ लिया जा रहा है ।
गीता-श्लोक 6.11--6.20 के माध्यम से प्रभू कहते हैं ------
1- ध्यान को अपनानें वाले को सामान्य भोजन करना चाहिए तथा सामान्य निद्रा लेनी चाहिए , अधिक भोजन करनें वाले एवं अधिक सोनें वाले का ध्यान फलित नही होता ।
2- ध्यान जहाँ करना हो वहाँ की जमींन समतल होनी चाहिए तथा वह स्थान शांत होना चाहिए।
3- ध्यान में बैठनें से पूर्व कोई बिछावन जमींन पर बिछा देना चाहिए ।
4- जिस स्थान का चयन किया गया हो उसके आस- पास चीटियों का निवास नहीं होना चाहिए ।
5- जब किसी आसन में बैठें तब आँखें लगभग बंद हो तो अच्छा होगा ।
6- ध्यान में अपांन वायु एवं प्राण-वायु का अनुपात 1:1 का होना चाहिए ।
7- ध्यान में शरीर के किसी भी भाग में तनाव नही आना चाहिए ।
8- शरीर तथा जमींन के बीच 90 अंश का कोण बनना चाहिए वह भी तनाव रहित स्थिति में ।
कुछ दिनों तक बैठनें का अभ्यास करना चाहिए और शरीर में हो रही घटनाओं को देखते रहना चाहिए ऐसा करने से शरीर सध जाएगा और ध्यान की आगे की यात्रा में आसानी होगी । शरीर साधनें के बाद मन को साधना चाहिए । मन साधना में मन में उठते विचारों को पकड़ कर नीर्विचार होनें का अभ्यास करना ही मन-ध्यान है।
गीता में परम प्रभू इन्द्रिय नियोजन से प्राण छोडनें तक की ध्यान बिधियों को बताया है ।
======ॐ======

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