Thursday, March 8, 2012

गीत रहस्य एवं हम का पहला भाग

आज से गीता मोती में " गीता रहस्य एवं हम " नाम से गीता की चर्चा प्रारम्भ हो रही है , आइये देखते हैं इस श्रृखला के पहले सोपान को -------

पहले कुछ बातें …..

गीता अनंत की उड़ान है [ Gita is a flight of the limitless space ]

गीता द्रष्टा उसे कहता है जो परम केंद्रित हो [ witnes is he who is always in the Supreme ]

द्रष्टा भाव वाला सत् को देखता है [ witness understands the ultimate truth ]

परमात्मा मन – बुद्धि फ्रेम में नहीं समाता [ The ultimate can not be put in the existing mind mechanism ]

जब मन भोग में अनासक्त होता है तब वह ब्यक्ति संकल्प रहित होता है

[ Man without determination has a mind which does not have attachment with passion ]

गीता मोह मुक्त करनें की औषधि है

[ Gita is a medicine of delusion ]

गीता वह मार्ग है जहाँ काम , कामना , क्रोध , लोभ एवं अहंकार का सम्मोहन नहीं काम करता

[ Gita is a way where gravity of sex , desire , anger , greed and ego does not work ]


===== ओम् ========



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