Saturday, March 10, 2012

गीता रहस्य एवं हम परिचय

उजाले अपनी यादों को साथ रहने दो

न जाने किस गली में जिंदगी की साम आ जाए

लिखनें वाला कोई साधारण ब्यक्ति नहीं महान सूफी संत है जिसको पता है कि उजाला क्या है ? और उसमें जीना कैसा होता है ? सबकी खोज तो उजाले की ही है , कौन अँधेरे में जीना चाहता है लेकिन उजाला तो तब दिखेगा जब हम अँधेरे से बाहर निकलें / क्या है उजाला और क्या है अँधेरा ? दिन और रात दोनों को एक साथ कौन देख सकता है ?

दिन और रात को एक साथ एक समय में वह देख सकता है जो उस जगह हो जहाँ न दिन हो और न रात हो और उस स्थान से एक तरफ उसे दिन दिखेगा और दूसरी तरफ रात दिखेगी/

मनुष्य का अंधकार से गहरा सम्बन्ध है ; बच्चा नौ महीनें माँ के गर्भ में अँधेरे का अनुभव करता है . बच्चा जब पैदा होता है तब उसकी ऑंखें बंद रहती हैं और पैदा होनें वाले बच्चों में लगभग 90% बच्चे रात में पैदा होते हैं यदि प्राकृतिक ढंग से उनको पैदा होने दिया जाय / प्राकृतिक मौत भी रात में ही आती है अतः मनुष्य का आदि एवं अंत अँधेरे में है और वह जीवन गुजार देता है प्रकाश को टटोलने में / प्रो . रमन , आइन्स्टाइन . ब्रोगली , सर्फती , मैक्स प्लांक एवं अन्य वैज्ञानिक जीवन भर प्रकाश को खोजते रहे और एक दिन अँधेरे में कहीं लुप्त हो गए / भगवान महाबीर , बुद्ध , नागार्जुन , तिलोपा , मारपा , आदि शंकाराचार्य , चैतन्य महा प्रभु , प्रभुपाद , जे कृष्णमूर्ति , ओशो सभीं प्रकाश को दिखानें वाले एक दिन अँधेरे में कहाँ और कैसे लुप्त हो गए कुछ कहा नहीं जा आ सकता /

ऊपर दो पंक्तियों में कवि कह रहा है ," उजाले अपनी यादों को साथ रहने दो " अर्थात उजाला उसे छोड़ कर जा रहा है , वह कवि उसे जाते देख भी रहा है और बड़े मासूमियत से कह रहा है , “ अच्छा जा ही रहा है तो जा लेकिन अपनी यादों को तो रहने दे तबतक जबतक जिंदगी की साम न आ

जाये /

सूफी लोग तब भी थे जब इस्लाम न था और जब इस्लाम आया तब सूफी लोग इस्लाम को अपना लिया क्योंकि इस्लाम का मूल अरब है और सूफी लोगों का स्थान भी है अरब/सूफी का अर्थ होता है सौफ अर्थात उन[जिससे कम्बल एवं गर्म वस्त्र बनाए जाते हैं] /सूफी लोग तपती धुप में भी कम्बल ओढ़ कर रहते हैं/


==== ओम्======


No comments:

Post a Comment

Followers