Thursday, March 29, 2012

गीता रहस्य एवं हम का अगला भाग

श्रीमद्भगवद्गीता का जन्म कहाँ हुआ?

इरान से बर्मा [ मयमार ] तक , कश्मीर से कन्याकुमारी तक का भू भाग प्राचीन शास्त्रों के आधार पर सोलह भागों में बिभक्त था जिनको महाजनपद कहा जाता था / सोलह महाजनपदों में एक था कुरु महाजनपद / कुरु महाजनपद को दो भागों में समझना चाहिए ; एक वह भाग जो गंगा - यमुना के मध्य का भाग था जिसको कुरुराष्ट्र कहते थे , जिसकी राजधानी थी हस्तिनापुर जो अगभाग 37Km मेरठ से दूर था / यः भाग पूर्ण रूप से विकसित था और कौरवों के अधिकार में था जिसको वे पांडवों को देना नही चाहते थे और दूसरा भाग यमुना एवं सरस्वती नदियों के मध्य का इलाका था जो दो भागों में बटा हुआ था , एक था कुरु जंगल जिसकी राजधानी थी इन्द्रप्रस्थ [ आज की दिल्ली ] एवं कुरुक्षेत्र जिसकी राजधानी थी स्थानेश्वर जो आज का कुरुक्षेत्र है / कुरु जंगल में नागा , राक्षस एवं असुर प्रजातियां रहा करती थी जिनके प्रधान नागा लोग होते थे जिनको तक्षक कहा करते थे / दिल्ली के आस पास का इलाका , रोहतक , भिवानी , हांसी एवं हिसार का इलाका इस भाग में आते थे / यह

भाग पूर्ण रूप से जंगल था जिसको खांडव बन कहा करते थे / रोहतक रोहिताका नामक कटीली झाडियों के नाम पर रखा गया है जो द्वापर युग में इस इलाके में एक जंगलके रूप में उपलब्ध थी / प्राचीन शास्त्र कहते हैं - कुरुक्षेत्र पंजाब के सिरहंद इलाके के दक्षिण की तरफ , कुरु जंगल के उत्तर में स्थित था / कुरुक्षेत्र से एक नदी इक्षुकमती बहा करती थी और सरस्वती नदी भी इस इलाके के पश्चिम से हो कर हिसार की ओर से बहती हुयी द्वारका के आस पास जा कर अरब सागर में गिरती थी / कुरुक्षेत्र के सम्बन्ध में वेद कहते हैं - यह स्वर्ग में रहनें वालों का तीर्थ है और यह 51 शक्ति पीठों में से एक है / कुरुक्षेत्र के इलाक में हा पेहवा जिसको Prithidaka नाम से द्वापर में जाना जात था जो अति पवित्र तीर्थों में से एक है /

ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि श्रीमद्भगवद्गीता का जन्म संभवतः 5561 BCE – 800 BCE के मध्य हुआ होगा / कुरुक्षेत्र मौर्य से ले कर हर्षवर्धन तक [ 300 BCE – 657 AD तक ] भारत भू भाग पर अपना विशेष स्थान बनाए हुए था / सन 1011 AD में यहाँ का शिव मंदिर महमूद गज़नी के द्वारा लूटा गया

था / पानीपत , सफेदो , करनाल , थानेश्वर , पेहवा , कैथल एवं अम्बाला आदि स्थान कुरुक्षेत्र के अंतर्गत आते रहे होंगे /

गीता श्लोक – 01 के सम्बन्ध में आप अभीं इतनी जानकारियों से अवगत हों और कुछ बातें अगले अंक बतायी जायेंगी /

धर्म क्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः/

मामका:पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय//

धर्म क्षेत्र कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छावाले मेरे और पाण्डु - पुत्रों नें क्या किया ? यह बात ध्रितराष्ट्र जी अपनें सहयोगी संजय से युद्ध स्थल में पूछ रहे हैं ----- यह प्रशंग आगे भी जारी रहेगा … ...


==== ओम्======


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