Saturday, September 4, 2021

योगदर्शन में चित्त योग साधना की मूल है

 योगदर्शन और सांख्य दर्शन में चित्त एक ऐसा तत्त्व है जो स्वयं तो जड़ है लेकिन पुरुष और प्रकृति की संयोग भूमि है । चित्त के माध्यम से पुरुष प्रकृति के 23 तत्त्वों को समझ कर स्वयं के मूल स्वरुप को समझ जाता है और जब ऐसी घटना घटती है जब वह योगी महाविदेहा स्थिति में होता है अर्थात Out of body experiencing में होता हुआ समाधि में डूबा होता है । 

यहाँ वह समझता और देखता है कि वह कौन है और पहले वह स्वयं को क्या समझ बैठा था । अष्टावक्र गीता और उपनिषदों में नेति - नेति की पराकाष्ठा  ही महाविदेहा की स्थिति होतो है ।

अब हम पतंजलि कैवल्य पाद में कुछ सुत्रों के आधार पर चित्त को समझते हैं , निम्न स्लाइड्स की मदद से ⬇️




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