Thursday, September 2, 2021

पतंजलि ,सांख्य , गीता और भागवत में चित्त क्या है ? भाग - 1

 पतंजलि योगसूत्र समाधि पाद के पूरे 51 सुत्रों से हम मैत्री स्थापित कर राग से वैराग्य , वैराग्य में समाधि और समाधि में बस कर आगे की यात्रा करने की अब तैयार कर रहे हैं । 

योग - यात्रा का माध्यम चित्त है । चित्त से पुरुष भोक्ता है और भोग की गहरी अनुभूति से वह तृप्त होंकर अपनें मूल स्वभाव में लौटना चाहता है । 

प्रकृति यह समझ कर तृप्त हो जाती है और अपनी साम्यावस्था में आ जाती है कि पुरुष उसे देख लिया है । पुरुष प्रकृति के 23 तत्त्वों को समझ कर अपने मूल  स्वरुप में लौट आता है लेकिन अभीं भी पुरुष मोक्ष प्राप्ति नहीं कर पाता । मोक्ष के लिए उसे और आगे की यात्रा करनी पड़ती है जब वह संस्कारों के बंधन से मुक्त होता है जिसे धर्ममेघ समाधि कहते हैं  । धर्ममेघ समाधि के सम्बन्ध में हम आगे कुछ यात्रा पूरी करने के बाद समझ सकेंगे ।

💐अभीं हम चित्त के स्वाभाव , वृत्तियॉं , परिणाम और धर्म जैसी बातों को देखने का प्रयाश कर रहे हैं ।

अब स्लाइड को देखते हैं ⬇️



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