Sunday, November 14, 2010

कर्म और गीता - 02




पिछले अंक में हमनें कुछ गीता सूत्रों को देखा ,
अब यहाँ कुछ और सूत्रों को हम ले रहे हैं ॥

सूत्र - 2.45

वेदों में गुण आधारित कर्मों के सम्बन्ध में बहुत प्रशंसा की गयी है
लेकीन ऐसे कर्मों को गीता बंधन कहता है
और यह कहता है .......
कर्म बंधनों से मुक्ति पाना ही निर्वाण है ॥

सूत्र - 3.5 , 18.11

कर्म मुक्त होना तो संभव नहीं क्यों की हर ब्यक्ति गुणों
द्वारा विवश किया जाता है ,
कर्म करनें के लिए लेकीन
कर्म में कर्म - फल की चाह न हो तो वह कर्म ,
मुक्ति का द्वार बन सकता है ॥

सूत्र - 8.3

वह जो निर्वाण का द्वार दिखाए , गीता का कर्म है ॥
आगे अगले अंक में कुछ और सूत्रों को दिया जाएगा ॥

===== ॐ ======

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