Tuesday, May 12, 2009

परमात्मा------5

परमात्मा को जाननें वालों की दो श्रेणियां हैं------यातो भय निवारण के लिए हम परमात्मा का
सहारा चाहते हैं या फ़िर लोभ के प्रभाव में आकर परमात्मा को याद करते हैं ।
परमात्मा को समझनें के दो मार्ग हैं ---यातो हमारे में पूर्ण समर्पण का भाव हो या फ़िर हम इतना सोंचे की
सोच-सोच कर अपनें बुद्धिको थकाकर स्थिर करदें ...इन दोनों परिस्थितिओं में एक ही स्थिति मिलती है --
जिसमें बुद्धि स्थिर हो जाती है । बुद्धि स्थिर हो तथा उसपर अंहकार की छाया न हो तब समर्पण -भाव आता है ।
बुद्धि थक कर स्थिर ह गयी हो और उस पर अंहकार की छाया हो तब समर्पण-भाव नही आ सकता । सदिओं बाद
कोई एक नानक,मीरा या कबीर आते हैं जिनमें जन्मसे समर्पण-भाव होता है , समर्पण के बिना परमात्मा
की खुशबूं पाना असंभव है और समर्पण भाव आनें पर उस ब्यक्ति का नया जन्म हो जाता है ...वह वह नही रह जाता
वह भिन्न हो जाता है ।
अब हम गीता में बुद्धि के आधार पर परमात्मा को समझनें की कोशिश करते हैं ।
गीता कहता है ------------
मन [10.22] बुद्धि [ 7.10 ] ध्रितिका [ 10.34 ] चेतना [ 10.22 ] समय [ 10.30 ] और आत्मा [ 10.20, 15.7]
परमात्मा हैं । अब समय आगया है की हम अपनें बुद्धि को गीता के इन श्लोकों पर केंद्रित करें ।
बिषय , इन्द्रियाँ , मन , बुद्धि , प्रज्ञा , चेतना , आत्मा और परमात्मा शब्द साधना में बार-बार हमें मिलते हैं पर
हम इनको जाननें की कोशिश ही नही करते --क्यो नही करते ? क्यों की हमें जल्दी है , हम कुछ पानें के लिए
साधना से जुड़ते हैं और जहाँ चाह है वहाँ भगवान् हो नही सकता ।
अब हम कुछ वैज्ञानिकों किसोच को देखते हैं फ़िर गीता पर वापिस आयेंगे ।
John Eccles says," Consciousness is extra-cerebral located within the human skull along the
brain somewhere where orthodox hindus keep their crest. This area is called supplementry
motor area[ SMA] where fusion of consceousness with the physical brain takes place . Consciousness survives even after the death of the physical brain . " Jonh Eccles[1903-1997]
got noble prize in neuro science in 1963.
Penfield[1891-1976], Wilder Penfield was a known nuro scientist and he expressed his
experiences as such----The mind is not brain , the mind works indepndent of the brain in the same way as a computer programmer works .
Roger Wolcott Sperry[ 1913-1994] got noble prize in neuro science in 1981 and he says,"Bodydoes not create the mind; the mind evolves much before the physical body and it composes the biochemical and neuronic brain mechanism for its help ."
C G Gung [ 1875-1961 ] a noted psychologist says --mind can be understood in four groups;
conscious mind, unconscious mind, collective mind and cosmos mind . All these mindsare interconnected .
सी जी ज़ंग का कोस्मिक माइंड वह है जिसके बारे में गीता सूत्र 7.7 के माध्यम से परम श्री कृष्ण कहते हैं---
संसा एक माला है और मैं उस माला का सूत्र हूँ।
ऊपर आप को गीता के सात श्लोक दिए गए हैं आप गीता प्रेस गोरखपुर का कोई गीता ले कर इन सूत्रों को
उसमें बार-बार पढ़ें , जब आप ऐसा करेंगे तो आप को ऐसा लगेगा ------इन सूत्रों के माध्यम से आप की
एक यात्रा प्रारंभ हो आरही है जो बाहर [संसार ] से अंदर की तरफ़ की है ।
हम समय के चक्र में हैं , हमारा मन संसार में रूचि रखता है , मन के इस कार्य में बुद्धि उसका साथ देती है --
यहाँ तक तो बाहर की यात्रा है लेकिन इसके बाद प्रज्ञा, चेतना , आत्मा और परमात्मा की यात्रा तो अन्दर की
यात्रा है । याद रखनें की बात है ...अन्दर की यात्रा बाहर से प्रारंभ होती है अर्थात हमारी यात्रा बाहर से अन्दर
की यात्रा है । जब तक बिषय को नही समझा जाता , जब तक इन्द्रीओं से मैत्री स्थापित नही होती और जब
तक मन संशय रहित नही होता तब तक अन्दर की यात्रा हो नही सकती ।
संसार का होश पूर्ण अनुभव हमें स्वतः अन्दर की यात्रा पर ला देता है ....संसार को अनुभव का क्षेत्र समझना चाहिए ।
मन, बुद्धि , चेतना से आत्मा को जानो और यह ज्ञान आपको परमात्मा से मिलादेगा ।
=======ॐ=========

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