Saturday, May 9, 2009

परमात्मा क्या है ?

प्यार ही परमात्मा है
प्यार ह्रदय में धड़कता है
ह्रदय का प्यार इन्द्रीओं से मिलकर ----
वासना बन जाता है
आत्मा - परमात्मा ---
ह्रदय में बसते हैं [10।20, 15.7, 15.15, 18.61, 13.17 ]
परम प्यार में डूबा ----
परा भक्त होता है
परा भक्त -----
साकार में निराकार देखता है
परा भक्त के लिए
परमात्मा निराकार नहीं रहता [6.30, 9.29, 18.54, 18.55 ]
आसक्ति रहित कर्म
पारा भक्त का होता है
ध्यान माध्यम से ----
परमात्मा की आवाज ----
ह्रदय में सुनाई पड़ती है [13.24]
पारा भक्ति उदित होनें पर क्या होता है ?
सामान्यतया एक भोग से सम्मोहित ब्यक्ति में बहनें वाली उर्जा 350 cycles/second की frequency
होती है लेकिन एक पारा भक्ति में डूबे ध्यानी में यह frequency 2,50,000 cycles/second की हो जाती है ।
इस स्थिति का योगी out of body की अनुभूति प्राप्त करता है जिसको समाधि कहते हैं ।
समाधि परमात्मा की झलक दिखाती है ।
=====ॐ======

No comments:

Post a Comment

Followers