Saturday, March 28, 2009

वासना क्या है?

तन्त्र कहता है ............वासना के बिषय बदलनें से क्या होगा? और बुद्ध कहते हैं......वासना दुष्पूरहै।
वासना है क्या?
चाह वासना का सूचक है,वासना समयाधीन है जो हर पल अपना रंग-रूप बदलती रहती हे ह्रदय में भाव उठते हैं,
जो विकार रहित होते हैं । ह्रदय में उठा भाव जब मन-बुद्धि तन्त्र में पहुचता हे तब वही भाव वासना का रूप धारण
कर लेता हे ।
वासना-तत्त्व
काम,आसक्ति,संकल्प-विकल्प,कामना,क्रोध,लोभ,मोह,अंहकार,भय एवं आलस्य वासना - तत्त्व हैं । वासना गुणों
से उठती है
सात्विक-वासना
सात्विक वासना में सघन तीब्र अंहकार होता है जो अपनें में कामना को छिपाकर रखता है ।
राजस-वासना
राजस-वासना में धनात्मक-अंहकार के साथ कामना,लोभ,क्रोध होता है ।
तामस-वासना
तामस-वासना में मोह,भय के साथ नकारात्मक अंहकार होता है जो ब्यक्ति को एकांत में लेजाता है।
ध्यानमें इन पर होश बनाना पड़ता है.......
  • जहाँ आसक्ति है वहां काम,कामना,क्रोध तथा लोभ भी होंगे।
  • जहाँ चाह है वहाँ राम नहीं होते।
  • जहाँ मोह है वहाँ भय के साथ आलस्य भी होगा।
  • जहाँ काम का सम्मोहन है वहा राम का होना संभव नहीं।
  • काम,क्रोध तथा लोभ नरक के द्वार हैं।
  • काम का सम्मोहन बुद्धि तक होता है।
  • केवल आत्मा केंद्रित योगी काम के प्रभाव में नहीं आता ।
  • योगी और राम के बीच राजस-तामस गुणों की दीवार होती है ।
  • मोह के साथ वैराग सम्भव नही।
  • वैराग के बिना परमात्मा को जानना सम्भव नहीं।
  • गुणों से अप्रभावित योगी परमतुल्य होता है ।

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