Thursday, March 12, 2009

प्रकृत-पुरूष

प्रकृत-पुरूष को समझनें केलिए देखिये गीता के निम्न श्लोकों को.......
श्लोक- 8.16
ब्रह्म लोक सहित सभी लोक पुनरावर्ती हैं----अर्थात आज हैं, कल समाप्त भी होंगे अर्थात सब का वर्तमान यह बता रहा है की यह धीरे- धीरे समाप्ति की ओर बढ रहा है
श्लोक- 13 . 1 , 13 . 2
सभी भूतों की रचना क्षेत्र- क्षेत्रज्ञ के योग से है
श्लोक- 13 . 9
प्रकृत-पुरूष अनादि हैं \
श्लोक- 15 .1 से 15 . 3 तक
यहाँ बताया जा रहा है किसंसार क्या है ? संसार में तीन गुंणोंका एक माध्यमहै जिस से संसार सबको भोग- भगवन , क्रोध, लोभ,मोह एवं अंहकार के बंधन से बाधता है संसार को
वैराग्यता - अवस्था में जाना जा सकता है
श्लोक-15.16
संसार में दो पुरूष हैं ----एक नाशवान स्थूल शरीर है और दूसरा अनाश्वान जीव-आत्मा है
श्लोक- 12.20,13.17,13.22.15.7,15.15,18.61
आत्मा ही परमात्मा है
आप ऊपर दिए गए सूत्रों को बार-बार मनन करें तब आप समझ सकते हैं कि -----------
संसार परमात्मा का फैलाव है जिसमें हमें आकर्षित होनें के सभी तत्व भरे पड़े हैं जिनके प्रति
होश बनाकर ब्रह्म की अनुभूति पायी जा सकती है

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