Wednesday, January 6, 2010

गीता ज्ञान - 44

बुद्धिहीन ब्यक्ति कौन है ? ----गीता श्लोक ....7.24

वह बुद्धिहीन ब्यक्ति है जो परमात्मा में आस्था न रखता हो -- गीता श्लोक 7.24 कहता है ।
श्री कृष्ण कहते हैं ----बुद्धिहीन ब्यक्ति मुझे जन्म,जीवन एवं मृत्यु के अधीन साकार रूप में समझते हैं लेकीन मैं ......
मन-बुद्धि सीमा के परे परम अब्यक्त भाव हूँ जो टाइम - स्पेस में भी है और इसके बाहर भी है तथा जो टाइम -स्पेस से प्रभावित नहीं है । अब आप सोचिये की कौन बुद्धिवाला है ?
गीता में परमात्मा को मन-बुद्धि के स्तर पर समझनें केलिए 11 अध्यायों में लगभग 82 श्लोक हैं और आप से अनुरोध है की आप इन सूत्रों को अवश्य देखें , हो सकता है आप के अन्दर बहनें वाली उर्जा का रुख बदल जाए ।
जब आप गीता में दिए गए परमात्मा सम्बंधित सूत्रों को देखेंगे और उन पर गहराई से सोचेंगे तब आप को
जो मिलेगा वह इस प्रकार होगा ------
[क] परमात्मा और भोग को एक साथ एक बुद्धि में एक समय नहीं रखा जा सकता ।
[ख] ब्रह्म की अनुभूति मन-बुद्धि सीमा में सिमित नहीं है ।
[ग] परमात्मा परम अक्षर , परम अब्यक्त भाव है ।
[ ऊपर दिए गए सत्य के लिए आप देखें गीता सूत्र ----2.42 - 2.44 , 6.21 , 7.24 , 12.3 - 12.4 ]
जब यहाँ तक की यात्रा ठीक तरह से पुरी होती है तब पता चलता है की -----
सत्य भावातीत है और इसके लिए आप देखें गीता के निम्न श्लोकों को .........
2.16 - 2.17 , 8.20 - 8.22 , 9.4 , 10.2 - 10.3 , 13.15 , 7.12 -7.13
सभी भावों का श्रोत प्रभु है लेकीन स्वयं भावातीत है ।

====ॐ=======

No comments:

Post a Comment

Followers