Friday, January 29, 2010

गीता ज्ञान - 62

बुद्धि केन्द्रित ब्यक्ति का परमात्मा कौन है ?

पहले गीता के कुछ सूत्रों पर नजर डालते हैं -----
[क] गीता सूत्र - 10.22, 7.10 - 7.11
मन , बुद्धि , चेतना और काम , मैं हूँ - ऐसी बात श्री कृष्ण कह रहे हैं ---सोचिये इस बात पर
[ख] गीता सूत्र - 10.20
सब का आदि , मध्य , अंत के रूप में सबके ह्रदय में स्थित आत्मा के रूप में , मैं हूँ।
[ग] गीता सूत्र - 13.17, 13.22
माया से परे देहमें , ह्रदय में साक्षी के रूप में आत्मा , ज्योतियों की ज्योति , कर्म करनें की ऊर्जा , मैं हूँ ।
[घ] गीता सूत्र - 15.7, 15.15
मन - बुद्धि की ऊर्जा सबके ह्रदय में स्थित सनातन आत्मा , मेरा अंश है ।
[च] गीता सूत्र - 18.61
मैं सब के ह्रदय में स्थित सब को उनके कर्मों के आधार पर अपनी माया से भ्रमण कराता हूँ
[छ] गीता सूत्र - 2.16, 2.28
सत भावातीत है और सब का वर्तमान अब्यक्त से अब्यक्त का मध्य है ।
[ज ] गीता सूत्र - 9.19, 13.12
सत - असत परमात्मा है और परमात्मा न सत है , न असत है ।
[झ] गीता सूत्र 11.37...अर्जुन कहते हैं ---आप सत - असत से परे परम ब्रह्म हैं ।
[प] गीता सूत्र - 8.20, 8.21, 15.6
swayam प्रकाशित अब्यक्त से परे अब्यक्त परमधाम परमात्मा का निवास है ।
[फ] गीता सूत्र - 4.38, 13.15, 13.24, 7.24, 12.3 - 12.4
परमात्मा की अनुभूति ध्यान में ह्रदय में मिलती है और परमात्मा मन - बुद्धि से परे की अनुभूति है ।

यदि आप अपनें को बुद्धि केन्द्रित समझते हैं तो उठाइये गीता और ऊपर दिए गए श्लोकों की बातों को समझनें की
कोशीश करें - क्या पता कब और कैसे आप को परम सत मिल जाए ।

=======ॐ====

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